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बलौदा बाजार – छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में अक्टूबर महीने में हुई असामान्य भारी बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे धान की खड़ी फसल और सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। किसानों ने धान में भूरा माहो और ब्लास्ट जैसे रोगों के प्रकोप की सूचना दी है, जबकि सब्जियों की जड़ें गलने लगी हैं।
जिले में पिछले पंद्रह दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे अधिकांश खेतों में पानी भरा हुआ है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल इस समय बाली निकलने और फूल आने की अवस्था में है, जो अत्यधिक नमी के प्रति संवेदनशील है। किसानों का कहना है कि वे लगातार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है।

एक किसान ने बताया, "पिछले पंद्रह दिनों से बीमारियों का असर लगातार बढ़ रहा है। जरूरत से ज्यादा बारिश की वजह से खेतों में पानी भरा हुआ है, जिससे धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं।"
धान के अलावा, लौकी, टमाटर, भिंडी और बैंगन जैसी सब्जियों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। किसानों के अनुसार, खेतों में पानी भरने से इन सब्जियों की जड़ें गलने लगी हैं, और उन्हें बचाने के लिए कीटनाशकों का उपयोग दोगुना करना पड़ा है।
कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगातार वर्षा और नमी के कारण परागण (pollination) प्रभावित हो सकता है, जिससे खाली बालियां और अधपके दाने बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, तेज हवाओं और बारिश से फसल के झुकने का खतरा है, जिससे कटाई के समय कठिनाई हो सकती है। यदि वर्तमान मौसम की स्थिति बनी रहती है, तो धान के उत्पादन में 25 से 30% तक की कमी आ सकती है।
राज्य सरकार ने 15 नवंबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद की घोषणा की है। हालांकि, खेतों में अत्यधिक नमी के कारण उस समय तक मंडियों में धान की आवक कम रहने की संभावना है।
भू-अभिलेख कार्यालय से प्राप्त वर्षा आंकड़ों के अनुसार, सुहेला में 1130.5 मिमी, पलारी में 1059.4 मिमी, सोनाखान में 940.7 मिमी, बलौदाबाजार में 936.2 मिमी, भाटापारा में 925 मिमी, लवन में 909.1 मिमी और कसडोल में 844.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।

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