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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बीते 20 वर्षों में हुए आठ प्रमुख गोलीकांडों में से अधिकांश में अवैध हथियारों का उपयोग किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में वर्तमान में 1,068 लाइसेंसी बंदूक धारक हैं, लेकिन जिन घटनाओं में जानें गईं या दहशत फैली, उनमें ज्यादातर में देसी कट्टा या बिना लाइसेंस की पिस्तौल से फायरिंग की गई।
अधिकारियों ने बताया कि 2004 से अब तक हुई इन घटनाओं में हत्या, आपसी रंजिश और विवाद मुख्य कारण रहे हैं। वहीं, दो से तीन आत्महत्या के मामलों में लोगों ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली मारी। इनमें 2012 में तत्कालीन एसपी राहुल शर्मा और सितंबर 2025 में बिल्डर चित्रसेन सिंह के बेटे संस्कार सिंह की आत्महत्या के मामले शामिल हैं।
स्थानीय पुलिस के अनुसार, अवैध हथियारों की आपूर्ति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से की जाती है। बिलासपुर जिला एमपी और यूपी की सीमाओं के पास होने से देसी कट्टे और पिस्तौल आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, इन हथियारों की खरीद कुछ हजार रुपये में की जाती है, जबकि सप्लायरों तक पहुंचना अब भी चुनौती है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2004 से 2022 के बीच हुई प्रमुख घटनाओं में रविकांत राय, सुशील पाठक, और संजू त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या शामिल है। अन्य मामलों में ज्वेलरी दुकानों पर फायरिंग और हिस्ट्रीशीटरों पर हमले के मामले दर्ज किए गए हैं।
कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि हर साल लगभग 10 से 15 व्यक्तियों को शिकार या सुरक्षा कारणों से हथियार लाइसेंस जारी किए जाते हैं। अधिकारियों ने कहा कि “अवैध हथियारों की बढ़ती उपलब्धता कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।”
बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि पिछले छह महीनों में चार पिस्टल और तीन कट्टे जब्त किए गए हैं। उन्होंने कहा, “पुलिस लगातार अभियान चला रही है और शहर में अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री में शामिल लोगों की निगरानी कर रही है।”
पुलिस के अनुसार, पिछले वर्ष नौ अवैध पिस्तौल और कट्टों के साथ कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में भी अभियान जारी है ताकि ऐसे हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला को चिन्हित कर रोका जा सके।

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