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आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार द्वारा कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। केजरीवाल ने चेतावनी दी है कि इस कदम से भारतीय किसानों के पास "आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।"

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केजरीवाल ने कपास आयात शुल्क हटाने पर मोदी सरकार पर साधा निशाना:
केजरीवाल ने कपास आयात शुल्क हटाने पर मोदी सरकार पर साधा निशाना: "भारतीय किसान आत्महत्या को मजबूर होंगे"

केजरीवाल ने कपास आयात शुल्क हटाने पर मोदी सरकार पर साधा निशाना: "भारतीय किसान आत्महत्या को मजबूर होंगे", आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार द्वारा कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। केजरीवाल ने चेतावनी दी है कि इस कदम से भारतीय किसानों के पास "आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।"

किसानों के लिए संकट: अमेरिकी कपास का बढ़ता प्रभाव

केजरीवाल ने अपने बयान में कहा, "अभी तक हमारे किसानों की कपास बिक जाती थी, लेकिन अमेरिका की कपास नहीं बिक पाती थी। अब मोदी सरकार ने 19 अगस्त से 11 प्रतिशत ड्यूटी हटा दी है।" उन्होंने विस्तार से बताया कि इस फैसले के कारण भारतीय कपास अंतरराष्ट्रीय बाजार में 15-20 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हो जाएगी।

फसल कटाई के समय गहराएगा संकट

केजरीवाल ने आगाह किया, "अक्टूबर-नवंबर से जब हमारे किसान कपास लेकर मंडियों में जाएंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि उनकी कपास खरीदने वाला कोई नहीं है।" उनके अनुसार, इस नीति से भारतीय कपास उत्पादकों के लिए बाजार में टिक पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा, जिससे वे गहरे वित्तीय संकट में फंस जाएंगे।

टैक्सटाइल कंपनियों का रुझान अमेरिकी कपास की ओर

केजरीवाल ने दावा किया कि देश की टैक्सटाइल कंपनियों ने पहले ही अमेरिका से कपास का ऑर्डर देना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में यह शुल्क केवल 40 दिनों के लिए (19 अगस्त से 30 सितंबर तक) हटाया गया था, लेकिन अब इसे 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। इस विस्तार से भारतीय किसानों को होने वाला नुकसान और भी बढ़ जाएगा।

गुजरात के किसानों का उदाहरण और पीएम मोदी के पुराने वादे

केजरीवाल ने 2013 के गुजरात के कपास किसानों की स्थिति का हवाला दिया, जब उन्हें 1500 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता था। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 के चुनाव से पहले पीएम मोदी ने किसानों को 2500 रुपये प्रति क्विंटल दिलाने का वादा किया था। केजरीवाल ने अफसोस जताते हुए कहा, "आज 2500 तो दूर, किसानों को केवल 1200 रुपये मिलते हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि बीज, खाद और खेती से जुड़ी हर चीज़ महंगी हो गई है, जबकि किसानों को 2013 से भी कम दाम मिल रहे हैं। अब अमेरिकी कपास के भारतीय बाजारों में आने से जो कपास अभी 1200 रुपये में बिक रही है, उसके 900 रुपये भी नहीं मिलेंगे।

मोदी सरकार पर "अमेरिकी किसानों को मालामाल और भारतीय किसानों को कंगाल" करने का आरोप

केजरीवाल ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह "यूएस के किसानों को मालामाल कर रही है और भारतीय किसानों को कंगाल।" उन्होंने इस नीति को भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका बताया, जिससे लाखों किसानों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

निष्कर्ष: भारतीय किसानों के लिए एक अंधकारमय भविष्य?

कपास आयात शुल्क हटाने का यह फैसला भारतीय किसानों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घरेलू बाजार में विदेशी कपास की बाढ़ आ सकती है, जिससे भारतीय उत्पादकों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। ऐसे में सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

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