Article Body
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ शराब भट्ठी कांड के सभी 14 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति साबित करने में असफल रहा।
यह मामला दिसंबर 2004 का है, जब पामगढ़ के चांदीपारा में राउत मड़ई मेले के दौरान स्थानीय शिक्षक महेश खरे की संदिग्ध मृत्यु के बाद आक्रोशित भीड़ ने पास की शराब भट्ठी पर हमला कर दिया था। इस घटना में डिस्टिलरी मैनेजर भोला गुप्ता की पिटाई के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
2015 में जांजगीर-चांपा की विशेष सत्र अदालत ने भगवन लाल और अन्य 13 आरोपियों को हत्या और अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं कर पाया। अधिकांश गवाहों ने घटना के दौरान आरोपियों की पहचान नहीं की और कई गवाह शत्रुतापूर्ण हो गए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल भीड़ में मौजूद होना अपराध साबित नहीं करता, जब तक यह सिद्ध न हो कि आरोपी ने हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई हो। न्यायालय ने फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जब्त किए गए वस्त्रों और डंडों पर मिला रक्त मृतक के रक्त समूह से मेल नहीं खाता।
इन निष्कर्षों के आधार पर अदालत ने सभी 14 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

Comments