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आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए बच्चों को विदेशी वस्तुओं की सूची बनाने और उनसे दूरी बनाने की सलाह दी थी। आम आदमी पार्टी के नेता रुसेन कुमार ने इस बयान को 'बचकाना, भ्रामक और जनता को गुमराह करने वाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बयान बच्चों के भविष्य और उनकी मानसिकता के लिए बेहद हानिकारक है।

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PM मोदी के 'विदेशी वस्तुओं' वाले बयान पर AAP का पलटवार: 'बच्चों में नफरत भरने की कोशिश'
PM मोदी के 'विदेशी वस्तुओं' वाले बयान पर AAP का पलटवार: 'बच्चों में नफरत भरने की कोशिश'

आप नेता रुसेन कुमार ने बयान को बताया भ्रामक और हानिकारक, स्वदेशीकरण पर सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

रायगढ़ : PM मोदी के 'विदेशी वस्तुओं' वाले बयान पर AAP का पलटवार: 'बच्चों में नफरत भरने की कोशिश', आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए बच्चों को विदेशी वस्तुओं की सूची बनाने और उनसे दूरी बनाने की सलाह दी थी। आम आदमी पार्टी के नेता रुसेन कुमार ने इस बयान को 'बचकाना, भ्रामक और जनता को गुमराह करने वाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बयान बच्चों के भविष्य और उनकी मानसिकता के लिए बेहद हानिकारक है।

प्रतीकात्मक राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भर भारत पर AAP के सवाल

आम आदमी पार्टी ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को 'प्रतीकात्मक राष्ट्रवाद' और बच्चों को गुमराह करने वाले बयानों से बचना चाहिए। रुसेन कुमार ने कहा, "यदि सरकार वास्तव में 'स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत' बनाना चाहती है, तो उसे घरेलू उद्योग और अनुसंधान पर निवेश बढ़ाना चाहिए, स्टार्टअप्स और उद्यमिता को मज़बूती देनी चाहिए, और विदेशी पूंजी पर निर्भरता घटाने के लिए ठोस नीतियां बनानी चाहिए।"

'वसुधैव कुटुम्बकम' के विपरीत और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

रुसेन कुमार ने प्रधानमंत्री के 'वसुधैव कुटुम्बकम' के नारे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री इस भावना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों को विदेशी वस्तुओं के खिलाफ खड़ा करना इस विचार के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने चेतावनी दी, "अगर इसी सोच को लागू किया गया तो भारतीय बच्चों को विदेश जाकर पढ़ाई करने से भी रोका जाएगा। बच्चों के मासूम दिलों में इस तरह का नफरत का बीज बोना प्रधानमंत्री जैसे पद की गरिमा को कम करता है।" कुमार ने प्रधानमंत्री से बच्चों को वैश्विक नागरिक बनने की प्रेरणा देने का आग्रह किया, ताकि वे दुनिया भर से ज्ञान और तकनीक ग्रहण कर भारत को आगे बढ़ा सकें।

वैश्वीकरण के दौर में जटिल वास्तविकता: क्या है स्वदेशी, क्या विदेशी?

रुसेन कुमार ने आज के वैश्वीकरण के दौर में 'स्वदेशी' और 'विदेशी' के बीच अंतर करना बेहद कठिन बताया। उन्होंने कहा, "भारत की अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर आधारित हैं। बैंकिंग, बीमा, ई-कॉमर्स, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयाँ, ऑटोमोबाइल से लेकर डिजिटल सेवाओं तक हर जगह विदेशी पूंजी और तकनीक का सीधा प्रभाव है। ऐसे में बच्चों से यह कहना कि विदेशी वस्तुओं से दूरी बनाओ, जनता को गुमराह करने जैसा है।"

विज्ञान और तकनीक की सार्वभौमिकता

कुमार ने इस बात पर भी जोर दिया कि तकनीक, सेवाओं और उत्पादों का मूल्य उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता से तय होना चाहिए, न कि किसी 'नफरत की दृष्टि' से। उन्होंने कहा, "वैश्विक स्तर पर बनी तकनीक और सेवाओं को विदेशी कहकर बच्चों के मन में नकारात्मकता भरना उनके सीखने, नवाचार और आगे बढ़ने की प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। जो भी तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद हैं, वे सभी विज्ञान की देन हैं और विज्ञान की उपलब्धियाँ सार्वभौमिक होती हैं।"

गांधीजी की विरासत का गलत हवाला: AAP का आरोप

प्रधानमंत्री द्वारा महात्मा गांधी के स्वदेशी विचार का उल्लेख करने पर रुसेन कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "गांधीजी का स्वदेशी विचार उस दौर में औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ संघर्ष का हिस्सा था। आज उनके विचारों का सही अर्थ है—सतत विकास, आत्मनिर्भरता और न्यायपूर्ण अर्थव्यवस्था। लेकिन बच्चों को विदेशी वस्तुओं के खिलाफ खड़ा करना गांधीजी की सोच का गलत इस्तेमाल है।"

आत्मनिर्भर भारत बनाम नीतिगत विरोधाभास

आप नेता ने सरकार की नीतियों में 'दोहरापन' भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक तरफ "आत्मनिर्भर भारत" का नारा देते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही सरकार लगातार विदेशी निवेश को बढ़ावा दे रही है और विदेशों में जाकर विदेशी सरकारों को पूंजी निवेश के लिए आमंत्रित कर रही है। "विदेशी कंपनियों को टैक्स छूट, ज़मीन और पूंजीगत सुविधाएँ दी जा रही हैं। भारत की तकनीकी और औद्योगिक ज़रूरतें विदेशी पूंजी और कंपनियों से पूरी हो रही हैं। ऐसे में बच्चों को विदेशी वस्तुओं से परहेज़ की सीख देना नीतिगत दोहरापन है।"

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