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नोएडा : नोएडा स्थित क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जया सुकुल ने कहा है कि युवाओं में लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने से Popcorn Brain Syndrome के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे ध्यान, नींद और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
डॉ. सुकुल, जो Headspace Healing की संस्थापक हैं, ने एक साक्षात्कार में बताया कि यह स्थिति लगातार डिजिटल उत्तेजना के कारण उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा, “जब दिमाग को लगातार नोटिफिकेशन, वीडियो और ऐप्स से इनपुट मिलता रहता है, तो व्यक्ति एक चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता और उसका फोकस बार-बार भटकता है।”
उनके अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से टीनएजर्स और युवाओं में देखी जा रही है, हालांकि अब 30 से 45 वर्ष के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि Popcorn Brain Syndrome, इंटरनेट एडिक्शन से भिन्न है। “इंटरनेट की लत व्यक्ति के रिश्तों और करियर पर असर डालती है, जबकि Popcorn Brain ध्यान और भावनात्मक संतुलन को प्रभावित करता है,” उन्होंने कहा।
सुकुल ने बताया कि लगातार डिजिटल एक्सपोजर दिमाग की कार्यप्रणाली को बदल रहा है। इस स्थिति में व्यक्ति को ऑफलाइन जीवन धीमा और उबाऊ लगने लगता है क्योंकि ऑनलाइन वातावरण में सबकुछ तेजी से बदलता है।
लक्षणों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, नींद की गड़बड़ी, ध्यान की कमी और हर समय सतर्कता महसूस होना शामिल हैं।
उन्होंने सलाह दी कि प्रभावित लोग स्क्रीन-फ्री जोन बनाएं, नियमित अंतराल पर स्क्रीन से दूरी लें और योग या ध्यान करें। “बिना मतलब स्क्रॉलिंग से बचने की कोशिश करें और खुद से पूछें कि मैं फोन चला रहा हूं या फोन मुझे चला रहा है,” डॉ. सुकुल ने कहा।
फिलहाल Popcorn Brain Syndrome पर कोई आधिकारिक चिकित्सा वर्गीकरण उपलब्ध नहीं है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ती डिजिटल निर्भरता से जुड़ी एक उभरती चिंता का विषय है।

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